तीन साल की एक बच्ची की सर्दी ख्रांसी ठीक ही नहीं हो रही थी। लगातार इलाज के बाद भी जब वह ठीक नहीं हुई तो उसे ईएनटी स्पेशलिस्ट के पास ले जाया गया। सीटी स्कैन और एक्स-रे से पता चला कि उसकी श्वांस नलिका में कोई बीज फंसा हुआ है। ब्रोंकोस्कोप की मदद से बीज को बिना चीर फाड़ के निकाल दिया गया। बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है।
बच्ची के माता पिता से पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ कि बच्ची ने पिछले साल अक्तूबर माह में सीताफाल खाया था। सीताफल का यह बीज संभवत: तभी उसकी श्वांस नली में सरक गया था। इसी लिए बच्ची को सर्दी खांसी लगातार बनी हुई थी।
बच्चे के फेफड़े काफी खराब थी व निमोनिया के कारण सांस में काफी तकलीफ हो रही थी। पहले बच्चे को कोरोना टेस्ट करवाया गया व पूरी सावधानी के साथ। पेटल्स अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने जो रिस्क उठाते हुए दूरबीन के द्वारा जांच की व सीताफल का बीज निकाला। पुछताछ करने पर माता को याद आया पिछले साल अक्टुबर 2019 में बच्चे ने सीताफल का बीज खाया था जिसके खाने के बाद उसे खासी हुई थी। वही बीज छ: माह से फंसे होने के कारण फेफड़ों में संक्रमण कर दिया था। पेटल्स बच्चों के अस्पताल की टीम में शामिल डॉ.पुजा धुप्पड़, डॉ.अरूण कुमार, डॉ.कुलदीपक वर्मा, डॉ.सतीस राठी, डॉ.रोहित कुमार शर्मा व डॉ.चन्द्रपालं भगत, इनके अथक प्रयासों से इसको निकला गया। हर निमोनिया कोरोना नहीं होता है व बच्चों में खासकर बीज वाले फल खाने पर इस प्रकार की घटनाओं से बच्चों में जान का खतरा हो सकता है।











