अकेले भारत में छह लाख से ज्यादा बच्चे करते हैं धूम्रपान

Child smoking

Dr. B N Satpathy

DR. BRAHMANANDA SATAPATHY
MD, FCGP, FICRO ( TMH, Mumbai ),
Consultant  cum HOD  – Radiation Oncology
KMC Health City, Meerut, UP

 

विश्व ने 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाया। तम्बाकू का सेवन कई रूपों में किया जाता है जिसमें से सबसे ज्यादा प्रचलित तरीका है धूम्रपान, तम्बाकू चबाना और गुड़ाखू घिसना। महाविद्यालयीन युवाओं एवं अधेड़ावस्था को प्राप्त कर चुके पुरुषों के बीच यह लंबे समय से प्रचलित है। पर अब बच्चों में धूम्रपान करना अथवा अन्य तरीकों से तम्बाकू का सेवन करने का चलन बढ़ता जा रहा है। अकेले भारत में 600000 से अधिक बच्चे तम्बाकू का किसी न किसी रूप में सेवन करते हैं, इनमें से 190000 लड़कियां हैं। प्रतिदिन एक नया बच्चा इसमें शामिल हो जाता है।

भारत के चौंकाने वाले आंकड़े 

  1. ग्लोबल एटलस स्टडी के मुताबिक धूम्रपान करने वाले बच्चों की उम्र 10 से 16 साल के बीच है।
  2.  15 वर्ष से ऊपर आयु के 10 करोड़ लोग प्रतिदिन धूम्रपान करते हैं।
  3.  तम्बाकू सेवन से प्रति सप्ताह 17500 लोगों की मृत्यु हो जाती है। इनमें से अधिकांश ने 18 वर्ष की आयु से कम उम्र में ही तम्बाकू का सेवन प्रारंभ कर दिया था।
  4. भारत में तम्बाकू उद्योग का आकार लगभग दो लाख करोड़ का है।
  5. देश के शहरी समेत ग्रामीण इलाकों में भी स्कूलों के आसपास बिड़ी-सिगरेट की बिक्री होती है जो अपरिपक्व मस्तिष्क के बच्चों को आकर्षित करती है।

पहले धूम्रपान अत्यधिक गरीब परिवारों के बच्चों में ही आम था किन्तु अब परिपाटी में बदलाव आ रहा है। अब पैसे वाले संभ्रांत परिवारों के बच्चे अत्यधिक धूम्रपान करते देखे जा रहे हैं।

बच्चों में धूम्रपान की लत
अधिकांश ऐसे बच्चे कम उम्र में धूम्रपान करना प्रारंभ कर देते हैं जिनके माता-पिता में से कोई एक या फिर दोनों धूम्रपान करते हैं। घरेलू हिंसा, बाल शोषण, पारिवारिक तनाव या परिवार में मृत्यु से बच्चे धूम्रपान की ओर आकर्षित होते हैं। धू्म्रपान के चंगुल में फंसने वाले अधिकांश बच्चों के परिवार में किसी न किसी की मृत्यु मुख, गला या फेफड़े के कैंसर से हुई होती है। विज्ञापन, सोशल मीडिया के अलावा प्रभावशाली व्यक्तियों का स्टाइल में धूम्रपान करना इन बच्चों को प्रेरित करता है। मानसिक रूप से अपरिपक्व बच्चे जल्द ही देखादेखी में धूम्रपान करने लगते हैं। सहज सुलभ उपलब्धता भी इसका एक बड़ा कारण है।

बाल धूम्रपान के खतरे
कच्ची उम्र में धूम्रपान की लत कुछ ही दिनों में शराब एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन का मार्ग खोल देता है। नतीजतन ऐसे बच्चे कम उम्र में सेक्स करने लगते हैं, गर्भवती हो जाते हैं और शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से चौपट हो जाता है। ऐसे बच्चे सहज ही अपराध के लिए भी प्रवृत्त हो जाते हैं।

कैसे रोकें
बच्चों में धूम्रपान की लत को रोकने के लिए समाज को विभिन्न उपाय करने होंगे –

  1. स्वस्थ-पोषक जीवन शैली एवं बेहतर पारीवारिक माहौल।
  2. बच्चों के स्क्रीन टाइन (टीवी, कम्प्यूटर या स्मार्ट फोन पर बिताया जाने वाले वक्त) की निगरानी।
  3. बच्चों के खर्च पर कड़ी निगाह रखना।
  4. बच्चों के व्यवहार में अचानक आए परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होना।
  5. घर के आसपास सिगरेट के टोटे का पड़ा होना अथवा सिगरेट के धुएं की गंध आना।

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