कोविड-19 के (Covid-19) नए लक्षणों- हैप्पी हाइपोक्सिया (Happy Hypoxia) पर डॉक्टर भी चिंता में हैं, क्योंकि संक्रमण के कारण मरीजों में ऑक्सीजन का सैच्युरेशन लेवल काफी कम हो जाता है और उनमें कोई संकेत भी नही दिख रहे. कोरोना वायरस के इन मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर 70 फीसद भी दिख रहा है और कुछ मामलों में 50 फीसद तक भी दिख रहा है.
कोरोना वायरस (Covid-19) विश्वभर में अब तक लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है. कोरोना वायरस (Nobal Coronavirus) से मृत्यु का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. अब सभी लोग सिर्फ इसकी वैक्सीन के इंतजार में हैं, लेकिन वैक्सीन इतनी जल्दी नहीं बनने वाली है. क्योंकि वैक्सीन को कई चरणों से होकर गुजरना पड़ता है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कोरोना वायरस के लक्षण हर किसी में अलग-अलग नजर आ रहे हैं. कई मरीज ऐसे भी सामने आ रहे हैं जो सामान्य रहते हैं और उनको पता भी नहीं चलता कि उन्हें कोरोना वायरस है और हंसते-बोलते अचानक उनकी मृत्यु हो जाती है. इन मरीजों में वायरस का असर अंदर ही अंदर इतना बढ़ जाता है कि उनका ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है और मृत्यु हो जाती है. सामान्य तौर पर मरीज में ऑक्सीजन का स्तर गिरने पर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, पसीना आने के साथ ही बोलने में भी तकलीफ होती है. कभी-कभी तो व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है. वहीं कोरोना के मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर गिरने के बाद भी पता नहीं चलता और वे सामान्य रूप में होते हुए अचानक से मौत के मुंह में चले जाते हैं. इस समस्या को हैप्पी हाइपोक्सिया या साइलेंट हाइपोक्सेमिया कहा जा रहा है.
साइलेंट हाइपोक्सेमिया
साइलेंट हाइपोक्सेमिया वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के शरीर के किसी अंग तक ऑक्सीजन का पहुंचना एकदम कम हो जाता है. अक्सर पहाड़ी इलाकों पर ऑक्सीजन कम होती है और वहां हाइपोक्सेमिया के थोड़े बहुत लक्षण दिखाई देते हैं और नीचे उतरते ही ये लक्षण कम हो जाते हैं. प्रीमैच्योर बच्चों के जन्म के दौरान भी हाइपोक्सेमिया के लक्षण दिखते हैं. इसका कारण है कि समय से पहले जन्म लेने पर उस समय उनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं.
अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है
कोरोना वायरस ऐसा वायरस है, जिसमें मरीज को खतरे का अंदाजा भी नहीं होता है, इसलिए इसे साइलेंट हाइपोक्सेमिया कहा जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, हो सकता है कि कोरोना वायरस शरीर पर हमला कर रहा हो और वह शरीर के किसी अंग को नुकसान पहुंचा रहा हो और इसका मरीज को कोई लक्षण भी ना समझ में आएं और अचानक मरीज की मौत हो जाए.
नए लक्षणों से वैज्ञानिक भी चिंता में
कोरोना वायरस मुख्य रूप से श्वसन तंत्र, नाक और गले को प्रभावित करता है. अब नए लक्षणों पर डॉक्टर भी चिंता में हैं, क्योंकि संक्रमण के कारण मरीजों में ऑक्सीजन का सैच्युरेशन लेवल काफी कम हो जाता है और उनमें कोई संकेत भी नही दिख रहे. कोरोना वायरस के इन मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर 70 फीसद भी दिख रहा है और कुछ मामलों में 50 फीसद तक भी दिख रहा है.अन्य बीमारियों में ऑक्सीजन का लेवल इतना कम नहीं दिखा. फेफड़ों से संबंधित किसी भी अन्य बीमारी में ऑक्सीजन का यह स्तर कभी नहीं दिखा जो बड़ी ही गंभीर समस्या है.










