Dr Amol Shinde,
Gastroenterologist
Hitek Hospital Bhilai
आपाधापी के इस दौर में एसिडिटी और गैस की समस्या बेहद आम है। पर यदि एसिडिटी लम्बे समय से बनी हुई हो और वजन भी गिर रहा हो तो यह गंभीर स्थिति का सूचक है। ऐसी स्थिति में तत्काल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट से सम्पर्क करना चाहिए। यह कहना है बीएसआर हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ अमोल शिन्दे का।
उन्होंने बताया कि भोजन या खट्टा पानी के उछल कर मुंह में आ जाने का एक कारण गैस्ट्रो ईसोफेगियल रीफ्लक्स डिसीज (जीईआरडी) हो सकता है। जीईआरडी कई प्रकार की जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। आहार नली सिकुड़ सकती है, भोजन करना या कुछ भी निगलना कठिन हो सकता है। यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है। इसलिए जल्द से जल्द जांच करवाकर निश्चिंत हो जाना ही अच्छा है। इसके लिए एंडोस्कोपी और सोनोग्राफी सहित कुछ पैथोलॉजिकल टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं। इसका पूरा इंतजाम हाइटेक अस्पताल में है।
डॉ शिन्दे ने बताया कि यह एक गंभीर समस्या है जिसके कारण रोगी ठीक से भोजन नहीं कर पाता और कुपोषण का शिकार हो जाता है। इसका तत्काल ठीक किया जाना बेहद जरूरी होता है।
डॉ शिन्दे ने बताया कि एसिडिटी के लक्षण सभी में अलग अलग हो सकते हैं। सबसे आम शिकायत सीने में जलन की है। कुछ लोगों को सीने में दर्द या पीठ के बीच में दर्द हो सकता है। इसके साथ ही भोजन निगलने में कठिनाई हो सकती है। भोजन के बाद लेटने पर मुंह में खट्टा पानी आना, भोजन का गले में आ जाना या खांसी आना जैसे लक्षण हो सकते हैं। आहार नली की स्थिति तथा हर्निया की संभावना का पता लगाने के लिए एंडोस्कोपी एक सरल उपाय है।
उन्होंने बताया कि मोटापा, आरामतलब जिन्दगी, अत्यधिक मिर्च मसाला या तली हुई चीजों का सेवन करना स्थिति को गंभीर बना सकता है। धूम्रपान करना, शराब पीना, तनाव और अनिद्रा भी इसका कारण हो सकते हैं।
एसिडिटी की शिकायत होने पर खानपान में सुधार के साथ ही लाइफ स्टाइल में भी सुधार करना जरूरी हो जाता है। धूम्रपान तत्काल बंद कर दें। शराब छोड़ दें। प्रतिदिन थोड़ी कसरत करें, पैदल चलें, भोजन के कम से कम डेढ़-दो घंटे बाद ही सोने जाएं। उन्होंने कहा कि भोजन करने के तत्काल बाद नीचे झुकने या झुक कर काम करने से बचना चाहिए। किसी भी औषधि का प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए।











