डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर
दुनिया बेहद खूबसूरत हैं, इसलिए अपनी दृष्टि को सुरक्षित रखें
the world is bright save your sight!
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में मनाया गया विश्व ग्लूकोमा सप्ताह
0 वाद-विवाद एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन
दुनिया बेहद खूबसूरत हैं, इसलिए अपनी दृष्टि को सुरक्षित रखें, इसी ध्येय वाक्य के साथ पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय-डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल स्थित नेत्र रोग विभाग में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह ( World Glaucoma Week 2021 ) का आयोजन 7 मार्च से 13 मार्च तक किया गया। इस सप्ताह का उद्देश्य ग्लूकोमा का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए हर व्यक्ति को नियमित नेत्र (और ऑप्टिक तंत्रिका) परीक्षण कराने के लिए जागरूक और सजग करना है। इस विषय का मूल संदेश ( the world is bright save your sight!) जागरूकता बढ़ाने के लिए है कि नियमित नेत्र परीक्षण के माध्यम से लोग इस खूबसूरत दुनिया का आनंद लेते रहें।
विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 2021 के अवसर पर मेडिकल कॉलेज की ओर से विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए। सप्ताह का शुभारंभ 7 मार्च को अम्बेडकर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के वार्ड नं. 15 से परिचर्चा के माध्यम से हुआ। उसके बाद नेत्र विभाग की ओपीडी में नियमित रूप से मरीजों के लिये पेरीमेट्री जांच की व्यवस्था की गई थी। इसी क्रम में 10 मार्च को आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में पी. जी. स्टूडेंट को ग्लूकोमा परीक्षण एवं निदान की जानकारी दी गई। शनिवार 13 मार्च को विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के समापन के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन अस्पताल के फिजियोथेरेपी हाल में किया गया। इस कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के छात्र एवं एम्स के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा। इन दोनों प्रतियोगिता में विजयी रहे मेडिकल छात्रों को सम्मानित किया गया। ये सभी कार्यक्रम नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. निधि पांडे के नेतृत्व में आयोजित किये गये।
कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. निधि पांडे ने बताया कि ग्लूकोमा या कांचबिंद सामान्यतया 40 की उम्र के बाद होने वाली बीमारी है। अतः 40 के बाद हर व्यक्ति को प्रति वर्ष अपनी आंखों की ग्लूकोमा जांच करानी चाहिये। जिनके परिवार में किसी को ग्लूकोमा बीमारी रही हो, जिनकी आंखेां में चोट लगी हो, जिनको अधिक नंबर का चश्मा लगा हो, जिनको ब्लड प्रेशर और मधुमेह की बीमारी हो उन्हें ग्लूकोमा का खतरा हो सकता है। हालांकि ग्लूकोमा से हुये नुकसान की भरपाई संभव नहीं है किंतु नियमित जाचं एवं नेत्र विशेषज्ञ की सलाहनुसार दवाओं के सेवन से आंखों की बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है।
वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के समापन समारोह के मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज रायपुर के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. पी. के. मुखर्जी, वर्तमान अधिष्ठाता डॉ. विष्णु दत्त, कांकेर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एम. एल. गर्ग एवं राज्य कार्यक्रम अधिकारी अंधत्व नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा रहे। इस अवसर पर अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनित जैन, एम्स की सहायक प्राध्यापक डॉ. विजया साहू, डॉ. लुबना खान, अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. फुलझेले, डॉ. स्वाति कुजुर, डॉ. संतोष सिंह पटेल, डॉ. सुशील सचदेव, जिला अस्पताल से डॉ. अनुसुइया दत्त, डॉ. पद्मा दूबे एवं नेत्र सहायक श्री संजय शर्मा कार्यक्रम में शरीक हुए।










