ब्लैक फंगस की रोकथाम पर देना होगा ध्यान जानें इससे जुड़ी 3 अहम बातें : डॉ गुलेेरिया

नई दिल्ली। देश में पिछले दो महीनों में कोविड-19 की दूसरी लहर का कहर देखने को मिला। फिलहाल इस वक्त मामलों में कुछ कमी ज़रूर आई है, लेकिन अब कोविड के बाद ब्लैक फंगस इंफेक्शन ने भारत में डर का माहौल बढ़ा दिया है। इसकी गंभीरता को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने इसे भी एपिडेमिक घोषित कर दिया है।

ब्लैक फंगस से जुड़ी 3 अहम बातें

कोविड-19 मरीज़ों में फंगल इंफेक्शन के तेज़ी से बढ़ते मामले देखने को मिल रहे हैं। इस तरह का इंफेक्शन SARS के प्रकोप के दौरान कुछ हद तक देखा गया था। कोविड के साथ अनियंत्रित डायबिटीज़ भी म्यूकॉरमायकोसिस के विकास का जोखिम बढ़ा सकता है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. गुलेरिया ने ब्लैक फंगस के बारे में बताते हुए कहा कि हमें इस प्रकोप की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसमें तीन चीज़ें बेहद ज़रूरी हैं-

नियंत्रित ब्लड शुगर लेवल:

अपने शरीर के ब्लड शुगर स्तर को संतुलित रखना बेहद ज़रूरी है। खासतौर पर अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं। स्वस्थ डाइट, व्यायाम और सही वक्त पर दवाइयां इसे नियंत्रण में रख सकती हैं।

स्टेरॉयड्स और ब्लड शुगर लेवल: 

जो लोग स्टेरॉयड्स पर हैं, उन्हें अपना ब्लड शुगर लेवल रोज़ाना मॉनिटर करना चाहिए। ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से इम्यूनिटी कमज़ोर होती है और ब्लैक फंगस होने की यही बड़ी वजह है।

स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल: 

साथ ही इस बात को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए कि स्टेरॉयड्स कब देने हैं और कितनी डोज़ देनी है।  कोविड की इस दूसरी लहर में मरीज़ों पर स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। जिन लोगों को स्टेरॉयड्स की हाई डोज़ दी जा रही है, उनमें हाई ब्लड शुगर लेवल और ब्लैक फंगस होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

क्या है ब्लैक फंगस?

ब्लैक फंगस यानी म्यूकॉरमायकोसिस, एक ख़तरनाक और जानलेवा फंगल इंफेक्शन है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन वातावरण, मिट्टी, खाद जैसी चीज़ों में मौजूद म्यूकॉर्मिसेट्स नामक सूक्ष्मजीवों की चपेट में आने से होता है। इनके आसपास सांस लेने से या स्किन कॉन्टैक्ट में आने से ये संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह साइनस, नाक, आंखों, त्वचा, फेफड़े और दिमाग पर अटैक करता है।

कोरोना और ब्लैक फंगस में क्या है संबंध?

हमारा इम्यून सिस्टम वैसे तो ब्लैक फंगस से लड़ने की क्षमता रखता है, लेकिन कोविड-19 से अगर कोई संक्रमित है, तो उसका इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जिसकी वजह से ब्लैक फंगस इंफेक्शन भी हो जाता है। इसके अलावा कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाले स्टेरॉयड्स भी इम्यूनिटी को प्रभावित करते हैं। जिसकी वजह से कोरोना के मरीज़ का इम्यून सिस्टम बुरी तरह घायल हो जाता है। यही वजह है कि कोविड-19 के मरीज़ का इम्यून सिस्टम ब्लैक फंगस के खिलाफ लड़ने में नाकाम रहता है।

ब्लैक फंगस के लक्षण

वहीं, डॉ. नरेश त्रेहन ने ब्लैक फंगस के बारे में बात करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस को स्टेरॉयड का विवेकपूर्ण उपयोग और मधुमेह के अच्छे नियंत्रण की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। कोविड से जुड़े म्यूकोर्मिकोसिस के पहले लक्षण हैं नाक में दर्द / जकड़न, गाल पर सूजन, मुंह के अंदर फंगस पैच, पलक में सूजन आदि। डॉ.  त्रेहन ने कहा कि इसके लिए आक्रामक चिकित्सा उपचार की आवश्यकता पड़ती है।

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