नई दिल्ली। कोरोना से रिकवरी के बाद ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस से बचाव भी जरूरी है। देश के कई राज्यों में ब्लैक और व्हाइट फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में येलो फंगस का मामला भी दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना संक्रमितों को फंगस से अधिक खतरा है। खासकर मधुमेह के मरीजों को ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरा है। यह बीमारी मधुमेह में इम्यून सिस्टम कमजोर होने, लंबे अंतराल तक वेंटिलेटर पर रहने और वोरिकोनाजोल थेरेपी के चलते होती है। साथ ही अनियंत्रित शुगर और स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल की वजह से भी मधुमेह के मरीजों में ब्लैक फंगस देखा गया है।
इसके लिए सरकार ने एडवायजरी कर लोगों को प्राथमिक लक्षण में ही डॉक्टर्स से संपर्क करने की सलाह दी है। कोताही बरतने पर यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। कई मामलों में आंखों की सर्जरी करनी पड़ जाती है। इसके लिए तेलंगाना के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉक्टर रमेश रेड्डी ने मधुमेह के मरीजों को कोरोना से रिकवरी के बाद भी दो महीने तक लगातार घर में भी मास्क पहनने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह के मरीजों को ब्लैक फंगस से अधिक खतरा है। इससे बचाव के लिए घर पर भी मास्क लगाएं। उन्होंने आगे कहा कि ब्लैक फंगस संक्रामक रोग नहीं है। इससे उनलोगों को अधिक खतरा है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है। मस्तिष्क और फेफड़ें संक्रमित होने की स्थिति में मरीज की मौत भी हो सकती है। इसके लिए प्राथमिक लक्षण जैसे चेहरे में दर्द, आंख की पलक में सूजन और कम दिखने पर तत्काल डॉक्टर से लेकर इलाज कराएं। वर्तमान समय में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्लैक फंगस के मरीजों को उपचार हेतु दवाइयां और दो सुई लगाने की सलाह दी है। वहीं, आइसीएमआर ने मधुमेह से पीड़ित कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड की मात्रा कम करने या फिर बंद करने की सलाह दी है।
डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।










