कोरोना की तीसरी लहर में जहां बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है, वहीं कई राज्यों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पतालों में बच्चों के लिए वार्ड बनाए जा रहे हैं, बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। आईसीयू, ऑक्सीजन का अरेंजमेंट किया जा रहा है। इस बीच, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में तैयार हो रही कोरोना की नेजल वैक्सीन आशा की एक किरण है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में जहां बच्चों को ज्यादा खतरा है, इस स्वदेशी वैक्सीन से काफी उम्मीदें हैं। गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने एक नेजल स्प्रे तैयार किया है। इसका भारत में क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।
क्या है नेजल वैक्सीन?
इस वैक्सीन को नाक के माध्यम से दिया जाता है और यह सिंगल डोज वैक्सीन है। इस वैक्सीन के जरिए कोरोना वायरस को नाक के अंदर ही खत्म किया जा सकेगा, जिससे फेफड़ों में होने वाला इंफेक्शन नहीं होगा। भारत बायोटेक ने इस वैक्सीन का नाम कोरो फ्लू रखा है।
नेजल वैक्सीन के फायदे
- – इंजेक्शन से छुटकारा, सेल्फ भी ले सकेंगे।
- – नाक के अंदरूनी हिस्सों में इम्यून तैयार होने से सांस से संक्रमण का खतरा घटेगा।
- – इंजेक्शन से छुटकारा होने के कारण हेल्थवर्कर्स को ट्रेनिंग की जरूरत नहीं।
- – कम खतरा होने से बच्चों के लिए भी वैक्सीनेशन की सुविधा संभव
- – उत्पादन आसान होने से दुनियाभार में डिमांड के अनुरूप उत्पादन और सप्लाई संभव
- – इसके लिए अरबों रुपए की सुईयों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वयस्क बचे तो बच्चे बचेंगे
सौम्या स्वामीनाथन ने इस बात पर जोर दिया कि व्यस्कों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में वैक्सीन लगाया जाना चाहिए। वायरस के संक्रमण को पहले व्यस्कों में कम करना बेहद जरूरी है। उसके बाद ही बच्चों को बचाना आसान हो पाएगा। गौरतलब है कि भारत में अब तक वैक्सीन के 19 करोड़ से ज्यादा डोज लगाए जा चुके हैं। राज्यों में युद्धस्तर पर लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है।










