ब्लैक, वाइट और येलो फंगल के बाद सामने आया एक नया फंगल इंफेक्शन!

नई दिल्ली। भारत अभी कोरोना वायरस की जानलेवा लहर से जूझ ही रहा था कि कई अन्य तरह के फंगल इंफेक्शन्स ने सभी की चिंता और बढ़ा दी है। देश भर में अभी तक ब्लैक फंगस के कुल 11 हज़ार मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात और महाराष्ट्र ऐसे राज्य हैं, जो इस संक्रमण से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। गुजरात में ब्लैक फंगस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसी बीच वड़ोदरा के डॉक्टर्स के सामने एक नए तरह के फंगल इंफेक्शन ने दस्तक दे दी है। जीं, हां ब्लैक, फिर वाइट और फिर येलो फंगस के बाद अब एस्परगिलोसिस (Aspergillosis) नाम के फंगस के मामले भी सामने आए हैं।

ब्लैक फंगस की तरह ही एस्परगिलोसिस संक्रमण भी उन लोगों में देखा जा रहा है, जो हाल ही में कोविड-19 से रिकवर हुए हैं। गुरुवार को वड़ोदरा में ब्लैक फंगस के 262 नए मामले सामने आए और एस्परगिलोसिस के आठ मामले। इन सभी 8 मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

क्या है एस्परगिलोसिस फंगल इंफेक्शन?

एस्परगिलोसिस एक प्रकार के मोल्ड (कवक) के कारण होने वाला संक्रमण है। एस्परगिलोसिस संक्रमण से होने वाली बीमारियां आमतौर पर श्वसन प्रणाली को प्रभावित करती हैं, लेकिन उनके लक्षण और गंभीरता अलग-अलग हो सकते हैं। बीमारियों को ट्रिगर करने वाला मोल्ड, एस्परगिलस, घर के अंदर और बाहर हर जगह मौजूद होता है।

अधिकांश लोग के शरीर में एस्परगिलस बीजाणु सांस के ज़रिए प्रवेश कर जाते हैं, लेकिन वे बीमार नहीं पड़ते। लेकिन कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों में एस्परगिलस के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकसित होने का अधिक ख़तरा होता है।

एस्परगिलोसिस आमतौर पर उन लोगों में देखा जा रहा है, जिनकी इम्यूनिटी कमज़ोर है। हालांकि साइनस पल्मोनरी एस्परगिलोसिस, जो अभी COVID रोगियों में देखा जा रहा है, दुर्लभ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एस्परगिलोसिस, ब्लैक फंगल संक्रमण जितना घातक नहीं है, लेकिन कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।

किन लोगों को है जोखिम?

कोविड-19 मरीज़ों को हो रहे कई तरह के फंगल इंफेक्शन के पीछे स्टेरॉयड्स और कमज़ोर इम्यूनिटी को कारण माना जा रहा है। साथ ही इसके पीछे ऑक्सीजन की आपूर्ति को हाइड्रेट करने के लिए साफ पानी इस्तेमाल न किया जाना भी एक कारण बताया जा रहा है। कोविड-19 के उपचार में स्टेरॉयड का ज़्यादा उपयोग ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के पीछे प्रमुख कारणों में से एक है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स को स्टेरॉयड के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल के प्रति चेताया गया है।

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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