बदलते मौसम और बारिश के दिनों में वायरल बुखार टायफॉयड के कहर से बचा जा सकता है

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Dr. U S Gautam
Consultant Homeopathy
Vaishali (Bihar)

सारांश :- टायफॉयड बुखार एक तरह का ऐसा वायरल फीवर है जो तेजी से फैलने वाले वायरस के संक्रमण के कारण होता है। इसके वायरस बदलते मौसम और बारिश के दिनों में बजबजाते गंदे नाले और प्रदूषित पानी तथा जल जमाव के कारण तेजी से फैलने लगते हैं। ज्यादातर लोग इसे मियादी बुखार के नाम से जानते हैं। टायफॉयड बुखार अधिकतर लोगों को प्रदूषित पानी पीने और खाने के चीजों से होता है। फिर वही संक्रमित लोग अगर अपने साफ- सफाई और स्वच्छता पर ध्यान नहीं देते हैं और अपने हाथों से किसी भी खाने पीने की चीजों को छूते हैं या किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो फिर उन्हें भी इसी संक्रमण का शिकार बना देते हैं जिससे अन्य लोगों को भी टाइफाइड फीवर हो जाता है इसीलिए इसे वायरल बुखार कहते हैं।

सांकेतिक शब्द :- टाइफाइड बुखार के लक्षण और निदान।

आवश्यक जानकारी:-
बदलते मौसम के मिजाज के साथ बारिश के दिनों में अनजान बने तथा जानकारी के अभाव में आम जनमानस अपने बदले हुए परिवेश को अपने खान पान रहन सहन को मौसम और तापमान के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते हैं जिसके कारण भी अधिकतर लोगों को टायफॉयड बुखार हो जाता है। टाइफाइड बुखार होने पर मरीज को काफी तेज बुखार होता है जो 103 डिग्री से 104 डिग्री तक हो सकता है। आमतौर पर इसके संक्रमण के लक्षण 6 से 10 दिनों के बाद शरीर में लक्षणों के साथ पूर्ण रूप से दिखने लगते हैं। टाइफाइड बुखार का संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया का नाम ” सेलेमोनेला टायफाई ” बैक्टीरिया है जो खाने पीने की चीजों द्वारा एक जगह से दूसरे जगह फैलने लगता है। टायफॉयड बुखार में मुख्य रूप से मरीज को तेज बुखार, सर दर्द, जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द, हल्की सर्दी ,पेट दर्द, भूख नहीं लगना, सुस्ती और अप्रत्याशित कमजोरी महसूस होने लगता है। कभी-कभी क्रॉनिक टाइफाइड की तीव्रता में छाती में कंजेशन और नाक के शिराओं से खून आने लगता है जो काफी घातक साबित होता है। इस तरह के लक्षणों को देखते ही मरीज को अपने नजदीकी के किसी भी अनुभवी चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज लेना चाहिए क्योंकि टाइफाइड बुखार के सही जांच और समय से इलाज करने पर 2 से 4 सप्ताह में स्थाई रूप से ठीक हो जाता है। किसी- किसी मरीज में इसके संक्रमण का खतरा बार- बार रहता है, वैसे लोगों को अपने खान पान और साफ़ सफ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति:-

दैनिक जीवन में तेजी से बदलते परिवेश खानपान पर विशेष ध्यान के साथ अपने आस पास साफ़ सफ़ाई और स्वच्छ वातावरण बनाकर ऐसे संक्रमण को रोका जा सकता है। अन्य चिकित्सा प्रणाली में जहाँ गिने – चुने और लिमिट एंटीबायोटिक दवाएं है वहीं टायफॉयड बुखार के लिए होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति में देखा जाए तो हजारों दवाओं का भंडार है। इसके बावजूद भी होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति किसी भी मरीज को उसके पर्टिकुलर रोग के नाम पर दवा देने की इजाजत नहीं देता है। हाँ, उस रोग के साथ मरीज के मानसिक, भावनात्मक, और शारीरिक स्तर के साथ रोग के संपूर्ण लक्षणों के आधार पर चुनी हुई किसी भी एक दवा के माध्यम से रोगी को पूर्ण आरोग्य लाभ देने में सक्षम है। ऐसे टायफॉयड बुखार के लिए होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति में कुछ मुख्य दवाएं है जिन्हे अनुभवी चिकित्सकों के परामर्श के साथ लिया जा सकता है। जैसे – आर्सेनिक एल्बम, बेलाडोना, ब्रायोनिया , बैपटिसिया, कार्बो भेज, फास्फोरस और रस्टॉक्स जैसी अन्य कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं।
टायफॉयड बुखार से पीड़ित रोगी को अपने खाने- पीने की चीजों में हरी साग सब्जियों में पालक, लौकी, करेला, ताजे फलों के जूस, सेव , मौसम्मी , अनानास, अनार के दाने, दलिया, चावल मूंग की दाल की पतली खिचड़ी, गाय का दूध और हलका सुपाच्य भोजन लेना चाहिए।

परहेज :- मांसाहार वर्जित रखें जैसे- अंडा, चिकेन, मीट, मछली, के साथ गरिष्ठ भोज्य पदार्थ, तैलीय, मसालेदार, तीखा और चाय, नूडल्स, पिज़्जा, बर्गर, पानीपुरी जैसी चीजों को नहीं लें। सीवरेज या बाहर का प्रदूषित पानी पीने से बचें। शुद्ध और स्वच्छ पानी नहीं मिलने पर पानी को उबालकर और छान कर पीयें। पीने के पानी में भूल कर भी बर्फ का इस्तेमाल नहीं करें। किसी भी तरह का शारीरिक परिश्रम और व्यायाम नहीं करें तथा तनाव से मुक्त रहें, साथ ही अधिक से अधिक आराम और विश्राम करने का प्रयास करें।

निष्कर्ष :-
टायफॉयड बुखार से पीड़ित मरीजों को थोड़ी सी सावधानी, साफ़ सफ़ाई के साथ स्वच्छ और शुद्ध खानपान पर विशेष ध्यान देने और विशेषकर पीने का पानी का सही इस्तमाल करने से बचाव किया जा सकता है। किसी कारणवश टायफॉयड बुखार हो जाने पर मरीज को अपने नजदीकी के किसी भी अनुभवी और रजिस्टर्ड चिकित्सक से संपर्क या परामर्श कर होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति के सिद्धांतो के अनुसार चुनी हुई किसी भी एक दवा से पूर्णतः आरोग्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

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