लॉकडाउन में कैसे रखें अपने पैरों का ख्याल

sprainedankle

Dr. Pradeep Moonot

Dr Pradeep Moonot,
Orthopedic Surgeon & Podiatrist, Mumbai
Knee Foot and Ankle Clinic, Mumbai

पैर हमारे शरीर का पूरा भार उठाकर इधर से उधर ले जाने का काम करते हैं। इसलिए इनके स्वत: घायल होने की संभावना भी अधिक होती है। इनमें प्रमुख है टखनों की मोच और एड़ियों का दर्द। इनमें से कुछ स्थितियां केवल आराम या मामूली देखभाल से ठीक हो जाती हैं जबकि कुछ में चिकित्सक की मदद जरूरी हो जाती है। इसलिए जरूरी यह है कि हम इन चोटों को पहचानें ताकि आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय परीक्षण में विलम्ब न हो।

चलने फिरने में लापरवाही, ऊंची नीची या चिकनी सतह, ऊंची एड़ी के सैन्डिल आदि के कारण टखनों में मोच आ सकती है। यह लिगामेंट (तंतु) पर एकाएक खिंचाव पड़ने के कारण होता है। तीव्रता के आधार पर इसे तीन वर्गों में बांटा जा सकता है।
1- यदि खिंचाव से केवल एक ही तंतु चोटिल हुआ है तो यह आराम करने से ठीक हो जाता है। यदि मोच के बाद भी मरीज चल फिर पाता है और 24 घंटे के भीतर सूजन नहीं होती तो यह ग्रेड-1 की चोट है जिसमें डाक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है।
2- यदि मोच आने के बाद चलने में कठिनाई हो, संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो, सूजन हो तो यह दूसरे ग्रेड की मोच है। यदि टखने की ऊंची हड्डी को स्पर्श करने से दर्द महसूस हो तो तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करें।
3- यदि मोच गहरी हो तो टखने में तत्काल सूजन आ जाती है और पैर को जमीन पर टिकाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। इसमें एक्स-रे जांच पश्चात प्लास्टर तक की जरूरत पड़ सकती है।
टखनों की मोच में घरेलू उपाय –
टखनों की मोच की देखभाल घर पर की जा सकती है। इसे आर-आइ-सी-ई (राइस) टेक्नीक भी कहा जाता है।
आर से रेस्ट: टखनों की मोच होने पर आराम करना चाहिए। ऊंची नीची और चिकनी सतहों पर चलने से बचना चाहिए।
आइ से आइसिंग। मोच पर बर्फ लगाकर सिकाई करनी चाहिए। तीन से चार बार 15-20 मिनट के लिए आइस लगाया जा सकता है। इसके लिए बर्फ को तौलिये में लपेट कर सिकाई करें।
सी से कम्प्रेशन: मोच आने पर क्रेप बैंडेंज का उपयोग किया जा सकता ताकि घायल तंतु को आराम मिले और अन्य तंतुओं की भी सुरक्षा की जा सके। इसका उपयोग चलने-फिरने के समय करना चाहिए और बैठते ही इसे खोल देना चाहिए।
ई से एलीवेशन: इससे आशय है की विश्राम करते समय घायल स्थान (टखने) को ऊंचा उठाए रख सकते है। लेटते या बैठते समय यदि पैर को कुछ तकियों पर उठाकर रखा जाए तो सूजन कम होती है और दर्द में भी आराम मिलता है।

जब एड़ियों का दर्द करे परेशान-
एड़ियों का दर्द दो प्रकार का होता है। इसमें पहली तरह का दर्द सुबह उठने पर सर्वाधिक तीव्र होता है जो थोड़ी देर चलने-फिरने से ठीक हो जाता है। इसे प्लेंटार फैसिआइटिस कहते हैं। एड़ियों को पैर की अंगुलियों से जोड़ने वाली कोशिकाओं के घायल होने, बहुत ज्यादा चलने फिरने, नृत्य करने, व्यायाम से पूर्व पर्याप्त वार्मअप नहीं करने के कारण होता है। इसे थोड़ी सावधानी और कुछ व्यायामों के द्वारा घर पर ही ठीक किया जा सकता है।
एड़ियों के दूसरे प्रकार का दर्द विश्राम के समय नहीं होता। यह दर्द खड़े रहने पर ही प्रारंभ होता है। इसे हम स्ट्रेस फ्रैक्चर कह सकते हैं। इसकी वजह कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, बोन मिनरल डेन्सिटी का कम होना हो सकता है।

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