कोरोना की सेकेंड वेव ने जमकर तबाही मचाई हुई है। हॉस्पिटल और बेड से लेकर दवाइयों और ऑक्सीजन तक के लिए पेशेंट्स को जूझना पड़ रहा है। ऐसे में कोरोना की संभावित थर्ड वेव को देखते हुए लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लेकिन लोग भारत में उपलब्ध कोवैक्सीन और कोविशील्ड को लेकर असमंजस में हैं कि कौन सी वैक्सीन लगवाना बेहतर है। वैसे तो मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर ने कहा है कि, ‘दोनों वैक्सीन के बीच किसी तरह की तुलना नहीं की जा सकती। दोनों ही वैक्सीन इंफेक्शन और उसके बाद होने वाली गंभीर स्थिति से बचाव में कारगर हैं।’
क्या फर्क है कोविशील्ड और कोवैक्सीन में
कोविशील्ड
कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की मदद से तैयार किया गया है। इसे पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है। कोविशील्ड को सिंगल वायरस के जरिए बनाया गया है।
साइड इफैक्ट
इस वैक्सीन को लगवाने के बाद उस जगह पर दर्द, लाल होना, बुखार, बदन दर्द होना जैसी समस्या हो सकती है।
कीमत
इस वैक्सीन की कीमत सरकार ने 150 रुपए रखी है। राज्य सरकार ने 400 रुपए और प्राइवेट अस्पतालों में यह 600 रुपए में लगाई जा रही है।
कोवैक्सिन
कोवैक्सिन को आईसीएमआर (ICMR) और भारत बायोटेक ने तैयार किया है। इस वैक्सीन में डेड वायरस है जो आपके शरीर में जाकर एंटीबॉडी पैदा करते हैं। जो असली वायरस को पहचानने के लिए तैयार करता है और संक्रमण होने पर उससे फाइट करता है। कोवैक्सिन कोरोना के सभी वेरिएंट्स पर असरदार माना जा रहा है।
साइड इफैक्ट
इस वैक्सीन को लेने के बाद सूजन, दर्द, बुखार, पसीना, ठंड लगना, सरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कीमत
कोविशील्ड की तुलना में इसकी कीमत ज्यादा है। राज्य सरकार के लिए इसकी कीमत 400 रुपए है। प्राइवेट अस्पताल में 1200 रुपए।










