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लेख योगाचार्य श्री अरूण अग्रवाल के द्वारा साझा
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(पेट की समस्याओं, माईग्रेन और यूरीनरी सिस्टम को स्वस्थ रखने हेतु अत्यंत लाभकारी अभ्यास)
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पूरे विश्व में विगत २१ तारिक़ को योग दिवस मनाया जाता है। योग तंदुरस्ती प्राप्त करने की चाबी है, फिर भी अधिकतर लोग नियमित योगाभ्यास करने के बावजूद अपनी सेहत मे अपेक्षित सुधार नही कर पा रहे हैं। इसका मूलभूत कारण योग का सही रूप से ज्ञान का ना होना और साथ ही साथ खानपान में बरतने वाली सावधानियों का भी ज्ञान न होना है।
अपने लेख में जिस अभ्यास का वर्णन कर रहा हूं, यह लगभग सभी रोगों मे लाभकारी है पेट की सभी समस्याओं जैसे गैस, अपचन, जी मितलाना, भूख ना लगना और पाईल्स जैसी समस्याओं के साथ माईग्रेन (सिरदर्द) के लिऐ रामबाण ईलाज है। साथ ही किडनी, या मूत्र प्रणाली मे फंसे छोटी छोटी पथरी को फ्लस करके निकाल देता है। त्वचा और रक्त विकार मे अत्यंत लाभकारी अभ्यास है। वैसे भी नये अभ्यासी को योग शुरू करने के पूर्व इस अभ्यास को करना चाहिऐ।
यह हठ योग की एक क्रिया शंख प्रक्षालन का छोटा रूप है इसलिऐ इसे लधु शंख प्रक्षालन कहा जाता है। इसे किसी अवकाश वाले दिन घर पर आसानी से सुबह उठते ही खाली पेट में किया जाता है।
विधि – सबसे पहले एक बडी़ गंजी मे लगभग आठ गिलास पीने का पानी गुनगुना गरम करें। इसमें लगभग एक छोटी चाय चम्मच नमक मिलाकर घोल लें।
इसे अपने डायनिंग चेबल पर रख ले। साईड मे कुछ आसन करने के लिऐ मैट बिछाऐं। अब हमें दो गिलास पानी पीकर पांच आसन करना है। ये पांच आसन निम्नानुसार हैं।
१. ताडा़सन – दोनों हाथों की अंगुलियां एक दूसरे मे फंसाकर हाथों को ऊपर की शरीर को एडियों पर उठाकर तानना दो सेकंड रुककर वापस आना। इसे ४ बार करें।
२. तिर्यक ताडासन- पैरों को दूर दूर फैलाकर उसी प्रकार हाथ ऊपर रखकर दोनों हाथों कों पहले दायीं ओर एक साथ रखते हुऐ साईड मे मुडना। तिर्यक् ताडासन का अभ्यास ३-३ बार दाऐं-बायें झुककर कर लें।
३. कटिचक्रासन – पैरों को २ फिट फैलाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को दायीं ओर मोडकर,बायां हाथ दाऐं कंधे पर तथा दाहिना हाथ पीछे की ओर धुमाकर कमर पर लपेंटे। इसी अभ्यास को दूसरी ओर घूमकर भी कर लें। दोनों ओर ४-४ बार।
४. तिर्यक भुजंगासन – पेट के बल लेटकर पैरों को सीधा और लंबा फैलाकर रखना। दोनों हथेलियां कंधों के ठीक नीचे रहें। हथेलियों पर शरीर को साधते हुऐ सिर और धड़ को ऊपर उठाकर सिर बायी ओर मोड़ते हुऐ बायीं ओर से पैरों को देखना फिर, दाहिनी ओर से पैरों को देखना। सिर सीधा करके वापस नीचे लाना। इसे ४ बार दोहराना।
५. उदराकर्षण आसन- हाथों को घुटनों पर रखकर उकडू़ बैठ जाना (जैसे इंडियन टाईलेट में बैठते हैं) धड़ को दाहिनी ओर मोड़ते हुऐ शरीर के पीछे की ओर देखते हुऐ बाऐं घुटने को जमीन पर झुकाऐं। हथेलियां घुटनों पर रहें। वापस आकर शरीर को विपरीत दिशा मोड़कर करना। दोनों ओर ५-५ बार दोहराऐं।

इन पांच आसनों को ४-४ बार पूरा करने पर पुन: दो गिलास पानी पीकर ये पांच आसन ४-४ बार करें। फिर दो गिलास पानी पीकर पांच आसन ४-४ बार पूरा करें।
इस प्रकार पूरी क्रिया की तीन आवृती होने पर बचा पानी पीकर थोडा़ टहलें। कुछ समय पश्चात् मोशन होगा। हो सकता है पेट ज्यादा खराब होने पर मोशन ना हो, दो तीन बार हो, इस बात की चिंता ना करते हुऐ सुबह की नित्य क्रियाऐं पूरी करें। और लगभग एक डेढ़ घंटे के पश्चात् हल्का बिना तला नाश्ता करें तत्पश्चात् दिन भर सामान्य भोजन ले।
जिन्हे कब्जियत की अथिक समस्या है वे शुरू मे तीन दिन लगातार इस क्रिया को कर सकते हैं। फिर पेट ठीक होने पर सप्ताह मे एक बार अवश्य करें। सप्ताह मे एक बार सामान्य रूप से सभी को इसे करना चाहिऐ। ४-५ वर्ष के बच्चें को भी यह क्रिया खेल खेल में कराई जाऐ। उन्हे दो गिलास के स्थान पर प्रत्येक राऊंड में एक गिलास पानी ही पिलाकर कराऐं। बच्चे पेट की बीमारियों से बचे रहेंगे।















बहुत अच्छी आर्टिकल है सर जी. आपसे अनुरोध है की अगर आप स्पाइन के दर्द से जुड़े योगा के बारे में लिखे तो बहुत अच्छा हो जाएगा.
बहुत जल्द हम इस टॉपिक पर जानकारियां उपलब्ध कराएंगे , धन्यवाद्